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पंक्तिया - स्कूल की यादें

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  पंक्तिया - स्कूल की यादें   स्कूल में रोज़ देरी से जाना ,   और अपनी हाज़री दोस्तों से लगवाना l   होमवर्क पूरा करके ना ले जाना , और दोस्तों की कॉपी अध्यापक को दिखाना l   कक्षा में अध्यापक का  ना  होना , और सब दोस्तों का साथ मिल कर चिल्लाना l   अध्यापक से रोज़ मार खाना , और हर दूसरे दिन उनका हमें मुर्गा बनाना l   स्कूल की फीस टाइम पर ना भरना , और अध्यापक का फिर माता-पिता को बुलाना l   कक्षा की सफाई के बहाने प्राथना में ना जाना , और दूसरो के डब्बो से चोरी से खाना l माता-पिता का रोज़ पढ़ो पढ़ो चिल्लाना , और दोस्तों के साथ पढाई के बहाने खेलने चले जाना l   परीक्षा से रात भर पहले पढाई करना , और परीक्षा के दिन राम भरोसे रहना l   अध्यापको के अलग अलग नाम रखना , और पकडे जाने पे किसी और को फसाना l   शाम को लाइट जाने का इंतज़ार करना , और दोस्तों के साथ छुपन छुपाई खेलना l   स्कूल ख़तम होने से पहले निकल जाना , और घर पे अलग अलग कहानी सुनना l   गणित और साइंस क...

हलके फुल्के - विचार

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  हलके फुल्के – विचार लोग कहते हैं प्यार से मीठी कोई चीज़ नहीं होती , पर कम्बख्त वो ये क्यों भूल जाते हैं , के मौत तो डाइबटीज से भी होती हैं l दिल भरा था तो कोई सुनने वाला नहीं था , अब लोग पूछते हैं के बात क्या हुई l बहुत जल्दी बदलते हैं लोग इस दुनिया में , बहुत वक़्त लगता हैं लोगो की यहाँ फितरत समझने में l कुछ लोग प्यार को अपनी ज़िन्दगी बना लेते हैं , और उन्हें जैसे ही अपने प्यार से प्यारी कोई और मिले , उसे अपना बना लेते हैं l हम साथ थे उनके कुछ इस वजह से , के वो बस वजह पूछते रह गए , और हम साथ निभाते रह गए l धन्यवाद्!

कविता - मेरा गाँव

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शीर्षक -   मेरा गाँव वो मोहल्ला याद हैं, वो गलिया याद हैं, वो रातों को सोचते रहना, वो दिन के ख्वाब याद हैं मुझे, मेरा गाँव याद है मुझे l  वो वादे याद हैं, वो इरादे याद हैं, वो बारिश की रिमझिम, वो बादलो का गरजना याद हैं मुझे, मेरा गाँव याद है मुझे l  वो दोस्तों से शाम को बगीचे में मिलना, वो किसी और से अपने पैगाम उन तक भिजवाना, वो उनके जवाब के इंतज़ार की ख़ुशी में अपना वक़्त बिताना याद है मुझे, मेरा गाँव याद है मुझे l  वो गलियों में रुक रुक के उनको देखना, वो उनके मुड़ने पे खुद निकल जाना, वो उनसे बात करने की चाह में उनकी सहेलियों को दोस्त बनाना, वो उन्हें एक बार देखने के बहाने बार बार उनकी गली के चक्कर लगाना याद हैं मुझे, मेरा गाँव याद है मुझे l  वो नजरे झुका के उनका चले जाना, वो कहना बहुत था पर कुछ कह ना पाना, वो सोच सोच के रातो को अपनी नींदें उड़ाना, वो सुबह उठ के फिर से उसी सोच में डूब जाना याद है मुझे, मेरा गाँव याद है मुझे l  वो पानी का छत्त से टपकना, वो रात को अँधेरे में दिए जलना, वो माँ का चूल्हे पे रोटी बनाना, वो साथ में बिठा के अपने हाथो से मुझे खिलाना य...